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क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा ........!!!
अच्छे दिन लाने का वादा कर महंगे दिन लाने वाली मोदी सरकार ने शायद चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादा अच्छे सपने दिखा दिए थे! इसीलिए पीएम मोदी की पहली कड़वी गोली को जनता पचा नहीं पा रही है! मोदीजी, चुनाव जीतने के लिए आपकी मार्केटिंग जबर्दस्त और योजनबद्ध थी! उम्मीद थी कि ऐसे ही प्लानिंग आप नीतियों को लागू करने मे करेंगे! लेकिन शायद केंद्र मे पहुँचने के बाद आप थोड़ा आश्वस्त हो गए और यूपीए की रेल भाड़ा बढ़ाने की नीति का बम आपने अचानक फोड़ डाला! कम से कम जनता को रेल सुविधाओं के नाम पर कुछ राहत तो दे देते! कुछ नहीं तो महिला कोच ही बढ़ा देते, जिन ट्रैक पर खाने-पीने की सुविधा नहीं है वहाँ कुछ इंतजाम करा देते, देश मे कुछ रूट्स ऐसे हैं कि वहाँ पीने का पानी भी नसीब नहीं होता! कुछ ट्रेनों मे पेंट्री कार ही लगवा देते! एक तो भीषण गर्मी, कमजोर मानसून उस पर महंगाई की गर्मी से जनता तिलमिला गयी है! लोकसभा चुनाव के पहले आपने जो सपने दिखाए थे उनसे जनता ने शायद रामराज्य की कल्पना कर ली हो! इसलिए आपकी रेल किराए की पहली कड़वी गोली जनता पर भारी पड़ रही है! महंगाई की गर्मी से उसे अपच हो रही है!
रेल्वे के किराए और माल भाड़े मे बृद्धि से न केवल रेल का सफर महंगा हुआ साथ ही साथ जनता का घर बनाने का सपना भी सपना ही रह गया! माल भाड़े मे बढ़ोत्तरी से सीमेंट, लोहे, स्टील के साथ साथ खाने-पीने की वस्तुओं जैसे सब्जी, फल, दूध और सब कुछ जिनकी रेल से ढुलाई होती है, सब महंगे होंगे! कोयले की ढुलाई भी रेल से होती है वैसे ही बिजली की किल्लत से यूपी और उत्तर भारत ब्लैक आउट की समस्या से जूझ रहा है! फिर कोयले के भी दाम बढ़ेंगे जिससे बिजली और महंगी होगी! कुल मिलकर आम आदमी पर चारों तरफ से महंगाई की मार पड़ रही है! सिर्फ रेल भाड़े मे इजाफे से आम आदमी चारों तरफ से महंगाई के बोझ तले दब रहा है!
पीएमजी, आप चिंता मत करो, जनता ने भारी बहुमत से आपको चुना है हम सब ताउम्र आपका साथ देंगे! उम्मीद है आप अपने कहे वादों को बहुत हद तक पूरा करेंगे! मानते हैं विरासत मे मिली जर्जर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने मे टाइम लगेगा लेकिन इसकी मार आम जनता पर क्यों? आप रेल भाड़ा तो बढ़ा रहे हैं! लेकिन सुविधा के नाम पर क्या मिल रहा है? आपका प्रसंशक महिला वर्ग कम से कम उसे ही थोड़ी सी सुविधाएं दे देते! हमेशा से ही उसके साथ नाइंसाफ़ होता आ रहा है! हमेशा उसे अपने हक़ के लिए लड़ना पड़ रहा है! जैसे-तैसे वह घर से बाहर निकली खुद के अस्तित्व को ढूंढने के लिए, अपने घर का पेट पालने के लिए, महिलाओं की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन उसका भी किराया आपने बढ़ा दिया! कम से कम उसे रेलगाड़ी मे बैठने के लिए अतिरिक्त महिला कोच ही बढ़ा देते! जहां आप महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करते हैं वहीं उसको रोज रेलगाड़ी मे समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है! कुछ और नहीं तो कम से कम विशेष वर्ग के बारे मे सोचा होता!
उम्मीदों के साथ एक आम आदमी
मोदीजी आप हम आम जनता की उम्मीदों के दूत है! आप महंगाई तो बढ़ा रहे हैं लेकिन हमारी सैलरी तो नहीं बढ़ रही है! सीमित आय मे हम महंगाई की मार से कैसे बचेंगे! लेकिन हमारी उम्मीद आपसे टूटी नहीं है! उम्मीद है जल्दी ही आप जनहित को ध्यान मे रख अच्छे दिन लाएँगे! जनता ने यूपीए की नीतियों को नकारा था तब तो आपकी सरकार आई थी फिर यूपीए की नीतियो पर क्यों चलना? उम्मीद है आप अपने निर्देश पर फिर से अमल करेंगे! और जनहित मे अच्छे दिन लाएँगे!