Tuesday, December 23, 2014

प्रधान सेवक के 180 दिन: जनता से ताकत, अपनों से आफत

आज बाबरी मस्जिद की बरसी पर बीजेपी हर बार की तरह राम मंदिर को याद न कर संविधान निर्माता और दलितों के उद्धारक डॉ भीम राव अंबेडकर को याद कर रही है! वहीं ये भी सर्वविदित है कि नरेंद्र मोदी कट्टरवादी हिन्दू छवि को तोड़ते हुए सबका साथ सबका विकास की राजनीति के बल पर केंद्र की सत्ता में काबिज हुए हैं! मोदी पर देशवासियों का विश्वास बढ़ा है वहीं मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में भी बीजेपी ने सब सीटों पर जीत हासिल की और सबसे ज्यादा वोट उसे मुस्लिम बहुल इलाके से मिले! वहीं बाबरी मस्जिद के वादी हाशिम अंसारी ने भी राम लला को आजाद करवाने की अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है!

 इससे साफ होता है कि मुस्लिम समुदाय भी मोदी को स्वीकार रहा है! मुस्लिम समुदाय का हृदय परिवर्तन हो रहा है लेकिन वहीं मोदी के मंत्री और संघ के कुछ संगठन मोदी के केंद्र में आने के बाद एक के बाद एक सांप्रदायिक बयान दे रहे हैं जो मोदी सरकार की हिन्दुत्ववादी छवि को फिर कटघरे में ला खड़ा कर रहे हैं.......मोदी के केंद्र में आने के बाद पिछले छह महीनों में मोदी के कई मंत्रियों ने सांप्रदायिकता बढ़ाने वाले विवादित बयान दिये!

जुलाई में गोवा के सहकारिता मंत्री दीपक धवलीकर ने मोदी को कट्टरवादी हिन्दू नेता बताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को हिंदू राष्ट्र में बदल देंगे! उसके बाद गोवा के डिप्टीा सीएम फ्रांसिस डिसूजा भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! अगस्त में  केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! वहीं बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ कई बार मुस्लिम विरोधी और हिंदुत्ववादी बयान दे चुके हैं! हाल ही में केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योतिने भी भारत में सभी को हिन्दू करार दिया! वहीं ये भी कहा जाता है कि मोदी सरकार बीजेपी की मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारों पर चल रही है! और संघ और संघ की विभिन्न शाखाओं से भी हिन्दुत्व छवि को मुखर करने की आवाज आ रही है! संघ प्रमुख मोहन भागवत हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू कहलाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं संघ की ही शाखा विश्व हिन्दू परिषद के सर्वोच्च नेता अशोक सिंघल ने भी कहा कि दिल्ली में 800 साल बाद स्वाभिमानी हिन्दुओं की सरकार बनी है! यहाँ तक कि वरिष्ठ नेता सिंघल ये भी कहने से नहीं चूके कि केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो हिंदू स्वाभिमान में विश्वास करती है।

गौरतलब है, मोदी ने दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के तुरंत बाद ही अपने सांसदों, मंत्रियों की क्लास ली थी और सभी को संयमित भाषा में बोलने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बावजूद भी मोदी के मंत्री एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं तो सवाल उठता है मोदी की फटकार का नेताओं पर असर क्यों नहीं हो रहा है? इस पर मप्र कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा कि मोदी का रिमोट संघ के हाथों में है! वे एक जहरीली विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं! मोदी और उनके अधीनत्व मंत्री एक सोची समझी सुविचारित और सुनियोजित राजनीति के तहत काम कर रहे हैं! जिनकी विचारधारा ही जहरीली हो उनसे विकास और सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान एक राजनीतिक मज़ाक दिखाई देता है!


मिश्रा ने कहा कि बीजेपी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने में लगी हुई है! राम मुद्दा भाजापा की राजनीतिक सुख-सुविधा और व्यापार का माध्यम है! उन्हें मंदिर से कोई सरोकार नहीं है! मिश्रा ने मोदी के विदेशी दौरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी विदेशों में अपनी छवि चमकाने में लगे हुए हैं! उन्हें देश हित से कोई सरोकार नहीं है! वहीं साध्वी निरंजन के विवादित बयान पर मिश्रा ने कहा कि साध्वी जी को इस्तीफा देना चाहिए लेकिन बीजेपी उन्हें दलित कहकर जातिगत अवधारणा प्रस्तुत कर रही है! भले ही वे दलित हैं लेकिन उसके पहले वे एक मंत्री हैं और अपराध तो उन्होने किया है इसलिए सजा भी मिलना चाहिए!         

प्रधान सेवक के 180 दिन: जनता से ताकत, अपनों से आफत

आज बाबरी मस्जिद की बरसी पर बीजेपी हर बार की तरह राम मंदिर को याद न कर संविधान निर्माता और दलितों के उद्धारक डॉ भीम राव अंबेडकर को याद कर रही है! वहीं ये भी सर्वविदित है कि नरेंद्र मोदी कट्टरवादी हिन्दू छवि को तोड़ते हुए सबका साथ सबका विकास की राजनीति के बल पर केंद्र की सत्ता में काबिज हुए हैं! मोदी पर देशवासियों का विश्वास बढ़ा है वहीं मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में भी बीजेपी ने सब सीटों पर जीत हासिल की और सबसे ज्यादा वोट उसे मुस्लिम बहुल इलाके से मिले! वहीं बाबरी मस्जिद के वादी हाशिम अंसारी ने भी राम लला को आजाद करवाने की अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है!

 इससे साफ होता है कि मुस्लिम समुदाय भी मोदी को स्वीकार रहा है! मुस्लिम समुदाय का हृदय परिवर्तन हो रहा है लेकिन वहीं मोदी के मंत्री और संघ के कुछ संगठन मोदी के केंद्र में आने के बाद एक के बाद एक सांप्रदायिक बयान दे रहे हैं जो मोदी सरकार की हिन्दुत्ववादी छवि को फिर कटघरे में ला खड़ा कर रहे हैं.......मोदी के केंद्र में आने के बाद पिछले छह महीनों में मोदी के कई मंत्रियों ने सांप्रदायिकता बढ़ाने वाले विवादित बयान दिये!

जुलाई में गोवा के सहकारिता मंत्री दीपक धवलीकर ने मोदी को कट्टरवादी हिन्दू नेता बताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को हिंदू राष्ट्र में बदल देंगे! उसके बाद गोवा के डिप्टीा सीएम फ्रांसिस डिसूजा भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! अगस्त में  केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! वहीं बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ कई बार मुस्लिम विरोधी और हिंदुत्ववादी बयान दे चुके हैं! हाल ही में केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योतिने भी भारत में सभी को हिन्दू करार दिया! वहीं ये भी कहा जाता है कि मोदी सरकार बीजेपी की मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारों पर चल रही है! और संघ और संघ की विभिन्न शाखाओं से भी हिन्दुत्व छवि को मुखर करने की आवाज आ रही है! संघ प्रमुख मोहन भागवत हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू कहलाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं संघ की ही शाखा विश्व हिन्दू परिषद के सर्वोच्च नेता अशोक सिंघल ने भी कहा कि दिल्ली में 800 साल बाद स्वाभिमानी हिन्दुओं की सरकार बनी है! यहाँ तक कि वरिष्ठ नेता सिंघल ये भी कहने से नहीं चूके कि केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो हिंदू स्वाभिमान में विश्वास करती है।

गौरतलब है, मोदी ने दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के तुरंत बाद ही अपने सांसदों, मंत्रियों की क्लास ली थी और सभी को संयमित भाषा में बोलने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बावजूद भी मोदी के मंत्री एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं तो सवाल उठता है मोदी की फटकार का नेताओं पर असर क्यों नहीं हो रहा है? इस पर मप्र कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा कि मोदी का रिमोट संघ के हाथों में है! वे एक जहरीली विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं! मोदी और उनके अधीनत्व मंत्री एक सोची समझी सुविचारित और सुनियोजित राजनीति के तहत काम कर रहे हैं! जिनकी विचारधारा ही जहरीली हो उनसे विकास और सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान एक राजनीतिक मज़ाक दिखाई देता है!


मिश्रा ने कहा कि बीजेपी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने में लगी हुई है! राम मुद्दा भाजापा की राजनीतिक सुख-सुविधा और व्यापार का माध्यम है! उन्हें मंदिर से कोई सरोकार नहीं है! मिश्रा ने मोदी के विदेशी दौरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी विदेशों में अपनी छवि चमकाने में लगे हुए हैं! उन्हें देश हित से कोई सरोकार नहीं है! वहीं साध्वी निरंजन के विवादित बयान पर मिश्रा ने कहा कि साध्वी जी को इस्तीफा देना चाहिए लेकिन बीजेपी उन्हें दलित कहकर जातिगत अवधारणा प्रस्तुत कर रही है! भले ही वे दलित हैं लेकिन उसके पहले वे एक मंत्री हैं और अपराध तो उन्होने किया है इसलिए सजा भी मिलना चाहिए!         

16 दिसंबर... काला दिन... कड़वा सच.....

16 दिसंबर 2014/2012 एक काला दिन पाकिस्तान और भारत के इतिहास में...एक तरफ पाक में सोमवार 16 तारीख को बाल संहार हुआ वहीं दो साल पहले इसी काले दिन दिल्ली की सड़क पर दामिनी की चीख़ों से हिंदुस्तान हिल गया लेकिन आज तक संभल नहीं सका। पाकिस्तान का 16 दिसंबर भारत के लिए चेतावनी दे गया कि अभी भी संभल जाओ...वरना इस तरह हिन्दुत्व के लिए जबरन धर्म परिवर्तन और कट्टरवादिता फैलाने से वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी धर्म के नाम पर मार काट मचेगी। धर्म निरपेक्ष देश में जबरन हिन्दुत्व को थोपना और संस्कृति के नाम पर दंगे और तोडफोड करना, सांप्रदायिकता फैलाना, भारत जैसे सर्वधर्म समभाव देश को शोभा नहीं देता। आखिर पाकिस्तान में मंगलवार 16 दिसंबर बालसंहार किसका परिणाम था? राजनीति, धर्म और दहशतगर्दी का घालमेल? शायद हाँ!  यदि पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर कट्टरवादिता की फसल नहीं हुई होती और न ही राजनीतिक ताकतों द्वारा आतंकियों को पनाह दी गयी होती। इंसान को इंसान समझा गया होता। भारत के दर्द को भी पाकिस्तान ने महसूस किया होता। भारत के खिलाफ आतंक को रोकने में सहयोग दिया होता तो पाकिस्तान को ये काला दिन कभी नहीं देखना होता। लेकिन पाकिस्तान शुरू से ही भारत के खिलाफ आग उगल रहा है। आतंक की खेप भारत में पहुंचा रहा है। सीमा पर घुसपैठ कर रहा है। मुस्लिमों को भारत के खिलाफ भड़का रहा है। 


कहते हुए दुख को रहा है कि पाकिस्तान ने जो बोया है, वही काट रहा है। हम बालसंहार की भर्त्सना करते हैं लेकिन इस बात को कहने से भी गुरेज नहीं कि जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है, वह उसमें खुद गिरता है। लेकिन अभी भी वक्त है कि पाकिस्तान को संभल जाना चाहिए और कट्टरवादी सोच पर लगाम लगाकर दहशतगर्दों को राजनीतिक संरक्षण देना बंद करना चाहिए। वहीं पाकिस्तान के वर्तमान हादसे से भारत को भी चेत जाना चाहिए जिस तरह आतंकी, इस्लाम के नाम पर मासूम लोगों का ब्रेन वॉश करते हैं और उन्हें इस्लाम को लेकर कट्टर बनाते हैं वैसा ही कुछ भारत में भी हो रहा है। भारत में भी हिन्दुत्व कट्टरवादिता को लेकर आवाज़ें बुलंद होने लगी हैं। धर्म के नाम पर कुछ कथित हिंदुवादी संगठन देश में उपद्रव करते हैं। प्रेम के प्रतीक वेलेंटाइन डे पर आगजनी और तोडफोड करते हैं। संस्कृति की दुहाई देकर भले ही वे काले कारनामे पर्दे के पीछे करे लेकिन दुनिया के सामने प्रेम जाहिर करने वालों पर अत्याचार करते हैं, ये भारत की संस्कृति नहीं है। वहीं देश में चल रहे कथित धर्म परिवर्तन और घर वापसी कार्यकम भी कहीं से भी भारत की संस्कृति को नहीं दर्शाता।

 “धर्म का अर्थ धारणकरना होता है न कि जबरन धर्म में परिवर्तन कराना। लेकिन ये हिन्दुत्व के नाम पर कट्टरवादिता है जो लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन करा रही है। एक तरफ हम मदरसों का विरोध करते हैं कि वे मुस्लिमों को कट्टरवादिता की तालीम देते हैं लेकिन वहीं संघ की हिन्दुत्व को बढ़ावा देने वाली किताबों को भी देश के स्कूलों में पढ़ाने की वकालत कर रहे है जिनमें जन्मदिन पर केक काटने और मोमबत्ती बुझाने का बहिष्कार किया गया है। वहीं गीता को भी राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करने की बात कर रहे हैं लेकिन हमें यहाँ एक बात गौर करना चाहिए कि जिस तरह पाकिस्तान में कुछ कट्टरपंथियों ने ईश निंदा का कानून बनवा दिया, जिसके तहत अल्लाह या कुरान की निंदा करने वालों को फांसी का प्रावधान है, ऐसे ही भारत में यदि गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित कर दिया गया तो जो गीता को नहीं मानेगा, या गीता की आलोचना करेगा, वह देशद्रोही होगा और उसके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होगा। लेकिन सवाल उठता है, जिस देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है, धर्म निरपेक्षता है, वहाँ किसी एक विशेष किताब को राष्ट्रीय दर्जा देना है तो फिर अन्य धर्मों के धार्मिक ग्रन्थों ने क्या बिगाड़ा है? आखिर सभी धर्म की शिक्षा तो एक ही है। कोई भी धर्म, अधर्म करने के लिए नहीं कहता।

नई सरकार आने से भारत में भी कुछ हिन्दू कट्टरवादी संगठन भारत के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं वहीं सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन आज जरूरत है लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाने की, एक अच्छा नागरिक बनाने की। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सम्मान देने की न कि कुछ सांप्रदायिक ताकतों के आगे नतमस्तक होने की। हम आज भी 16 दिसंबर 2012 के दामिनी गैंग रेप को नहीं भूले हैं और न ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील हुए हैं। ऐसे में जरूरत हैं धार्मिक उन्माद को बढ़ावा न देकर भारत के संविधान की इज्जत की जाये और धर्म निरपेक्ष राष्ट्र को चरितरार्थ किया जाये। अंत में ....
इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना
हम चले नेक रास्ते पर
हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना!