Tuesday, December 23, 2014

प्रधान सेवक के 180 दिन: जनता से ताकत, अपनों से आफत

आज बाबरी मस्जिद की बरसी पर बीजेपी हर बार की तरह राम मंदिर को याद न कर संविधान निर्माता और दलितों के उद्धारक डॉ भीम राव अंबेडकर को याद कर रही है! वहीं ये भी सर्वविदित है कि नरेंद्र मोदी कट्टरवादी हिन्दू छवि को तोड़ते हुए सबका साथ सबका विकास की राजनीति के बल पर केंद्र की सत्ता में काबिज हुए हैं! मोदी पर देशवासियों का विश्वास बढ़ा है वहीं मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में भी बीजेपी ने सब सीटों पर जीत हासिल की और सबसे ज्यादा वोट उसे मुस्लिम बहुल इलाके से मिले! वहीं बाबरी मस्जिद के वादी हाशिम अंसारी ने भी राम लला को आजाद करवाने की अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है!

 इससे साफ होता है कि मुस्लिम समुदाय भी मोदी को स्वीकार रहा है! मुस्लिम समुदाय का हृदय परिवर्तन हो रहा है लेकिन वहीं मोदी के मंत्री और संघ के कुछ संगठन मोदी के केंद्र में आने के बाद एक के बाद एक सांप्रदायिक बयान दे रहे हैं जो मोदी सरकार की हिन्दुत्ववादी छवि को फिर कटघरे में ला खड़ा कर रहे हैं.......मोदी के केंद्र में आने के बाद पिछले छह महीनों में मोदी के कई मंत्रियों ने सांप्रदायिकता बढ़ाने वाले विवादित बयान दिये!

जुलाई में गोवा के सहकारिता मंत्री दीपक धवलीकर ने मोदी को कट्टरवादी हिन्दू नेता बताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को हिंदू राष्ट्र में बदल देंगे! उसके बाद गोवा के डिप्टीा सीएम फ्रांसिस डिसूजा भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! अगस्त में  केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! वहीं बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ कई बार मुस्लिम विरोधी और हिंदुत्ववादी बयान दे चुके हैं! हाल ही में केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योतिने भी भारत में सभी को हिन्दू करार दिया! वहीं ये भी कहा जाता है कि मोदी सरकार बीजेपी की मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारों पर चल रही है! और संघ और संघ की विभिन्न शाखाओं से भी हिन्दुत्व छवि को मुखर करने की आवाज आ रही है! संघ प्रमुख मोहन भागवत हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू कहलाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं संघ की ही शाखा विश्व हिन्दू परिषद के सर्वोच्च नेता अशोक सिंघल ने भी कहा कि दिल्ली में 800 साल बाद स्वाभिमानी हिन्दुओं की सरकार बनी है! यहाँ तक कि वरिष्ठ नेता सिंघल ये भी कहने से नहीं चूके कि केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो हिंदू स्वाभिमान में विश्वास करती है।

गौरतलब है, मोदी ने दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के तुरंत बाद ही अपने सांसदों, मंत्रियों की क्लास ली थी और सभी को संयमित भाषा में बोलने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बावजूद भी मोदी के मंत्री एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं तो सवाल उठता है मोदी की फटकार का नेताओं पर असर क्यों नहीं हो रहा है? इस पर मप्र कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा कि मोदी का रिमोट संघ के हाथों में है! वे एक जहरीली विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं! मोदी और उनके अधीनत्व मंत्री एक सोची समझी सुविचारित और सुनियोजित राजनीति के तहत काम कर रहे हैं! जिनकी विचारधारा ही जहरीली हो उनसे विकास और सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान एक राजनीतिक मज़ाक दिखाई देता है!


मिश्रा ने कहा कि बीजेपी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने में लगी हुई है! राम मुद्दा भाजापा की राजनीतिक सुख-सुविधा और व्यापार का माध्यम है! उन्हें मंदिर से कोई सरोकार नहीं है! मिश्रा ने मोदी के विदेशी दौरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी विदेशों में अपनी छवि चमकाने में लगे हुए हैं! उन्हें देश हित से कोई सरोकार नहीं है! वहीं साध्वी निरंजन के विवादित बयान पर मिश्रा ने कहा कि साध्वी जी को इस्तीफा देना चाहिए लेकिन बीजेपी उन्हें दलित कहकर जातिगत अवधारणा प्रस्तुत कर रही है! भले ही वे दलित हैं लेकिन उसके पहले वे एक मंत्री हैं और अपराध तो उन्होने किया है इसलिए सजा भी मिलना चाहिए!         

प्रधान सेवक के 180 दिन: जनता से ताकत, अपनों से आफत

आज बाबरी मस्जिद की बरसी पर बीजेपी हर बार की तरह राम मंदिर को याद न कर संविधान निर्माता और दलितों के उद्धारक डॉ भीम राव अंबेडकर को याद कर रही है! वहीं ये भी सर्वविदित है कि नरेंद्र मोदी कट्टरवादी हिन्दू छवि को तोड़ते हुए सबका साथ सबका विकास की राजनीति के बल पर केंद्र की सत्ता में काबिज हुए हैं! मोदी पर देशवासियों का विश्वास बढ़ा है वहीं मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में भी बीजेपी ने सब सीटों पर जीत हासिल की और सबसे ज्यादा वोट उसे मुस्लिम बहुल इलाके से मिले! वहीं बाबरी मस्जिद के वादी हाशिम अंसारी ने भी राम लला को आजाद करवाने की अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है!

 इससे साफ होता है कि मुस्लिम समुदाय भी मोदी को स्वीकार रहा है! मुस्लिम समुदाय का हृदय परिवर्तन हो रहा है लेकिन वहीं मोदी के मंत्री और संघ के कुछ संगठन मोदी के केंद्र में आने के बाद एक के बाद एक सांप्रदायिक बयान दे रहे हैं जो मोदी सरकार की हिन्दुत्ववादी छवि को फिर कटघरे में ला खड़ा कर रहे हैं.......मोदी के केंद्र में आने के बाद पिछले छह महीनों में मोदी के कई मंत्रियों ने सांप्रदायिकता बढ़ाने वाले विवादित बयान दिये!

जुलाई में गोवा के सहकारिता मंत्री दीपक धवलीकर ने मोदी को कट्टरवादी हिन्दू नेता बताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को हिंदू राष्ट्र में बदल देंगे! उसके बाद गोवा के डिप्टीा सीएम फ्रांसिस डिसूजा भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! अगस्त में  केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने भी भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू करार दिया था! वहीं बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ कई बार मुस्लिम विरोधी और हिंदुत्ववादी बयान दे चुके हैं! हाल ही में केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योतिने भी भारत में सभी को हिन्दू करार दिया! वहीं ये भी कहा जाता है कि मोदी सरकार बीजेपी की मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारों पर चल रही है! और संघ और संघ की विभिन्न शाखाओं से भी हिन्दुत्व छवि को मुखर करने की आवाज आ रही है! संघ प्रमुख मोहन भागवत हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू कहलाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं संघ की ही शाखा विश्व हिन्दू परिषद के सर्वोच्च नेता अशोक सिंघल ने भी कहा कि दिल्ली में 800 साल बाद स्वाभिमानी हिन्दुओं की सरकार बनी है! यहाँ तक कि वरिष्ठ नेता सिंघल ये भी कहने से नहीं चूके कि केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो हिंदू स्वाभिमान में विश्वास करती है।

गौरतलब है, मोदी ने दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के तुरंत बाद ही अपने सांसदों, मंत्रियों की क्लास ली थी और सभी को संयमित भाषा में बोलने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बावजूद भी मोदी के मंत्री एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं तो सवाल उठता है मोदी की फटकार का नेताओं पर असर क्यों नहीं हो रहा है? इस पर मप्र कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा कि मोदी का रिमोट संघ के हाथों में है! वे एक जहरीली विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं! मोदी और उनके अधीनत्व मंत्री एक सोची समझी सुविचारित और सुनियोजित राजनीति के तहत काम कर रहे हैं! जिनकी विचारधारा ही जहरीली हो उनसे विकास और सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान एक राजनीतिक मज़ाक दिखाई देता है!


मिश्रा ने कहा कि बीजेपी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने में लगी हुई है! राम मुद्दा भाजापा की राजनीतिक सुख-सुविधा और व्यापार का माध्यम है! उन्हें मंदिर से कोई सरोकार नहीं है! मिश्रा ने मोदी के विदेशी दौरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी विदेशों में अपनी छवि चमकाने में लगे हुए हैं! उन्हें देश हित से कोई सरोकार नहीं है! वहीं साध्वी निरंजन के विवादित बयान पर मिश्रा ने कहा कि साध्वी जी को इस्तीफा देना चाहिए लेकिन बीजेपी उन्हें दलित कहकर जातिगत अवधारणा प्रस्तुत कर रही है! भले ही वे दलित हैं लेकिन उसके पहले वे एक मंत्री हैं और अपराध तो उन्होने किया है इसलिए सजा भी मिलना चाहिए!         

16 दिसंबर... काला दिन... कड़वा सच.....

16 दिसंबर 2014/2012 एक काला दिन पाकिस्तान और भारत के इतिहास में...एक तरफ पाक में सोमवार 16 तारीख को बाल संहार हुआ वहीं दो साल पहले इसी काले दिन दिल्ली की सड़क पर दामिनी की चीख़ों से हिंदुस्तान हिल गया लेकिन आज तक संभल नहीं सका। पाकिस्तान का 16 दिसंबर भारत के लिए चेतावनी दे गया कि अभी भी संभल जाओ...वरना इस तरह हिन्दुत्व के लिए जबरन धर्म परिवर्तन और कट्टरवादिता फैलाने से वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी धर्म के नाम पर मार काट मचेगी। धर्म निरपेक्ष देश में जबरन हिन्दुत्व को थोपना और संस्कृति के नाम पर दंगे और तोडफोड करना, सांप्रदायिकता फैलाना, भारत जैसे सर्वधर्म समभाव देश को शोभा नहीं देता। आखिर पाकिस्तान में मंगलवार 16 दिसंबर बालसंहार किसका परिणाम था? राजनीति, धर्म और दहशतगर्दी का घालमेल? शायद हाँ!  यदि पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर कट्टरवादिता की फसल नहीं हुई होती और न ही राजनीतिक ताकतों द्वारा आतंकियों को पनाह दी गयी होती। इंसान को इंसान समझा गया होता। भारत के दर्द को भी पाकिस्तान ने महसूस किया होता। भारत के खिलाफ आतंक को रोकने में सहयोग दिया होता तो पाकिस्तान को ये काला दिन कभी नहीं देखना होता। लेकिन पाकिस्तान शुरू से ही भारत के खिलाफ आग उगल रहा है। आतंक की खेप भारत में पहुंचा रहा है। सीमा पर घुसपैठ कर रहा है। मुस्लिमों को भारत के खिलाफ भड़का रहा है। 


कहते हुए दुख को रहा है कि पाकिस्तान ने जो बोया है, वही काट रहा है। हम बालसंहार की भर्त्सना करते हैं लेकिन इस बात को कहने से भी गुरेज नहीं कि जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है, वह उसमें खुद गिरता है। लेकिन अभी भी वक्त है कि पाकिस्तान को संभल जाना चाहिए और कट्टरवादी सोच पर लगाम लगाकर दहशतगर्दों को राजनीतिक संरक्षण देना बंद करना चाहिए। वहीं पाकिस्तान के वर्तमान हादसे से भारत को भी चेत जाना चाहिए जिस तरह आतंकी, इस्लाम के नाम पर मासूम लोगों का ब्रेन वॉश करते हैं और उन्हें इस्लाम को लेकर कट्टर बनाते हैं वैसा ही कुछ भारत में भी हो रहा है। भारत में भी हिन्दुत्व कट्टरवादिता को लेकर आवाज़ें बुलंद होने लगी हैं। धर्म के नाम पर कुछ कथित हिंदुवादी संगठन देश में उपद्रव करते हैं। प्रेम के प्रतीक वेलेंटाइन डे पर आगजनी और तोडफोड करते हैं। संस्कृति की दुहाई देकर भले ही वे काले कारनामे पर्दे के पीछे करे लेकिन दुनिया के सामने प्रेम जाहिर करने वालों पर अत्याचार करते हैं, ये भारत की संस्कृति नहीं है। वहीं देश में चल रहे कथित धर्म परिवर्तन और घर वापसी कार्यकम भी कहीं से भी भारत की संस्कृति को नहीं दर्शाता।

 “धर्म का अर्थ धारणकरना होता है न कि जबरन धर्म में परिवर्तन कराना। लेकिन ये हिन्दुत्व के नाम पर कट्टरवादिता है जो लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन करा रही है। एक तरफ हम मदरसों का विरोध करते हैं कि वे मुस्लिमों को कट्टरवादिता की तालीम देते हैं लेकिन वहीं संघ की हिन्दुत्व को बढ़ावा देने वाली किताबों को भी देश के स्कूलों में पढ़ाने की वकालत कर रहे है जिनमें जन्मदिन पर केक काटने और मोमबत्ती बुझाने का बहिष्कार किया गया है। वहीं गीता को भी राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करने की बात कर रहे हैं लेकिन हमें यहाँ एक बात गौर करना चाहिए कि जिस तरह पाकिस्तान में कुछ कट्टरपंथियों ने ईश निंदा का कानून बनवा दिया, जिसके तहत अल्लाह या कुरान की निंदा करने वालों को फांसी का प्रावधान है, ऐसे ही भारत में यदि गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित कर दिया गया तो जो गीता को नहीं मानेगा, या गीता की आलोचना करेगा, वह देशद्रोही होगा और उसके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होगा। लेकिन सवाल उठता है, जिस देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है, धर्म निरपेक्षता है, वहाँ किसी एक विशेष किताब को राष्ट्रीय दर्जा देना है तो फिर अन्य धर्मों के धार्मिक ग्रन्थों ने क्या बिगाड़ा है? आखिर सभी धर्म की शिक्षा तो एक ही है। कोई भी धर्म, अधर्म करने के लिए नहीं कहता।

नई सरकार आने से भारत में भी कुछ हिन्दू कट्टरवादी संगठन भारत के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं वहीं सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन आज जरूरत है लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाने की, एक अच्छा नागरिक बनाने की। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सम्मान देने की न कि कुछ सांप्रदायिक ताकतों के आगे नतमस्तक होने की। हम आज भी 16 दिसंबर 2012 के दामिनी गैंग रेप को नहीं भूले हैं और न ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील हुए हैं। ऐसे में जरूरत हैं धार्मिक उन्माद को बढ़ावा न देकर भारत के संविधान की इज्जत की जाये और धर्म निरपेक्ष राष्ट्र को चरितरार्थ किया जाये। अंत में ....
इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना
हम चले नेक रास्ते पर
हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना! 

Monday, November 17, 2014

 
 कांग्रेस के नेहरू कार्यक्रम में मोदी नहीं .....
ये बात सही है कि कांग्रेस की न तो रणनीति अच्छी है और न ही मार्केटिंग! लोक सभा चुनाव में मिली शर्मनाक हार से भी कांग्रेस कुछ नहीं सीख सकी है! 60 साल तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस शायद मोदी के कहर से कमजोर पड़ रही है! उसके सोचने समझने की शक्ति भी क्षीण होती जा रही है वरना इतना अच्छा मौका उसने हाथ से जाने दिया जब वह अपना बड़प्पन दिखाकर अपना कद थोड़ा बड़ा सकती थी और भाईचारे की मिसाल दे सकती थी! नेहरू जयंती के कार्यक्रम में यदि कॉंग्रेस 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दे देती तो छोटी नहीं हो जाती बल्कि उसकी इज्जत बढ़ती ही !
एक तरफ कांग्रेस ने नेहरू जयंती पर दुनिया के 54 देशों के प्रमुखों को न्योता दिया लेकिन भारत के मुखिया नरेंद्र मोदी को नहीं, जो कांग्रेस की छोटी सोच को दर्शाता है! या फिर कांग्रेस में शिष्टाचार की कमी कह सकते हैं! कम से कम शिष्टाचार के नाते मोदी को न्योता भेजा जा सकता था वो भी तब जबकि यह स्पष्ट था कि मोदी कार्यक्रम में नहीं आने वाले थे क्योंकि वे आसियान यात्रा पर हैं!
कांग्रेस, मोदी सरकार से इस बात पर नाराज है कि 31 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को काफी तवज्जो दी वहीं इन्दिरा गांधी की अनदेखी कर दी! जबकि ज्ञात को जब कांग्रेस सत्ता में थी तो 31 अक्टूबर को इन्दिरा की पुण्य तिथि के रूप में ही याद किया गया है! मोदी के केंद्र में आते ही ये पहला मौका है कि दुनिया ने सरदार पटेल का महत्व भी जाना!
तो इस बार कांग्रेस के लिए तो मौका अच्छा था वह बीजेपी को भी थोड़ा नीचे दिखा सकती थी लेकिन हार से बौखलाई और उसके बाद पीएम मोदी द्वारा महात्मा गांधी और सरदार पटेल की जयंती पर देश व्यापी कार्यक्रम कर वाह वाह लूट ली और कांग्रेस को महसूस हुआ कि उनके पटेल- गांधी भी मोदी उनसे छीन रहे हैं! या फिर मोदी के बढ़ते कद से कांग्रेस तिलमिला गयी है! खैर जो भी है, लेकिन यह सच है कि कांग्रेस का ये रवैया उसे गर्त में धकेल रहा है!
वहीं पीएम मोदी ऐसे अवसरों को भुनाना बखूबी जानते हैं! मोदी अपनी रणनीति से अपने विरोधियों को भी अपना मुरीद बना लेते हैं! कांग्रेस राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपनी धरोहर समझती है, उन्हीं की जयंती पर मोदी ने “स्वच्छ भारत” अभियान देश भर में चलाया और बड़ी शख़्सियतों को तो इस आंदोलन से जोड़ा ही वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को भी जोड़ लिया! और सबकी तारीफ के पात्र बन गए!
वहीं मोदी लगातार “सबका साथ, सबका विकास” की राजनीति कर रहे हैं और समय समय पर कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर चलते हैं! वहीं पीएम मोदी शिष्टाचार और बड़े दिल का भी प्रदर्शन करते हैं! इसकी बानगी सबसे पहले देखने मिली लोकसभा के पहले सत्र में सांसदों के शपथग्रहण में पीएम मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के बाद सोनिया गांधी का शपथग्रहण हुआ! 16वीं लोकसभा के पहले दिन मोदी ने विपक्षी बेंच के पास जाकर सोनिया गांधी का अभिवादन भी किया! वहीं प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके घर भी गए और हाल ही में मनमोहन सिंह को जापान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर उन्हें बधाई भी दी साथ ही मनमोहन सिंह के जन्म दिन पर भी उन्हें बधाई दी! यह मोदी के बड़े दिल और खुली सोच को दर्शाता है, जो उन्हें हर दिल अजीज बना रहा है और वह देश के साथ विदेशों में भी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से चढ़ रहे हैं!

हाल ही में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए नसबंदी कांड में अब तक 14 महिलाओं की मौत हो चुकी है और 33 अभी भी गंभीर हालत में हैं! परिवार नियोजन के लिए गई महिलाएं तो मौत के मुंह में जा चुकी हैं लेकिन पीछे छोड़ गयी हैं कई अनगिनत सवाल...... जिनका जवाब प्रशासन और चिकित्सक एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं! पहला सवाल तो सरकारी योजनाओं पर लग रहा है जिस जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार देश भर में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रही है वही बेअसर साबित होकर लोगों को लील गया! जिस डॉक्टर आर के गुप्ता को रमन सरकार ने 50 हजार से अधिक नसबंदी ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड बनाने पर पुरुष्कृत किया, उसी डॉक्टर ने सरकार की योजना पर कलंक लगा दिया और एक नसबंदी कैंप में सबसे अधिक महिलाओं की मौत का एक और रिकॉर्ड अपने और शायद छत्तीसगढ़ सरकार के नाम कर दिया! आपको बता दें आरोपी डॉक्टर गुप्ता ने 5 घंटे में 83 ऑपरेशन कर दिये!
 
सबसे बड़ा प्रश्न तो यही खड़ा हो रहा है कि बेचारा गरीब आदमी सरकार की योजनाओं पर विश्वास करेगा ? सरकार पर भरोसा करके फिर से मौत की दहलीज पर जाएगा? यदि नहीं जाएगा तो देश की जनसंख्या नियंत्रण का क्या होगा? और यदि जाएगा तो उसे कितनी हिम्मत बटोरनी पड़ेगी ?
शायद प्रदेश और देश के इतिहास में ये पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी सारी महिलाओं की मौत नसबंदी ऑपरेशन की वजह से हुई है! लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी लेगा कौन? 
 
  नसबंदी कांड....एक और रिकॉर्ड ???
वह डॉक्टर, जिसे भगवान का रूप समझकर उन महिलाओं ने खुद को उसके हवाले कर दिया था! डॉक्टर पर इतना विश्वास करके गाँव की गरीब, अनपढ़ महिलाएं अस्पताल की उस दहलीज पर गईं थी जिसे वह नया जीवनदाता समझती थीं! लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि भगवान समान डॉक्टर सिर्फ प्रोफेशनल तरीके से काम करेगा! यदि उसका काम सर्जरी है तो सिर्फ सर्जरी ही करेगा! और अपनी ज़िम्मेदारी भूल जाएगा! क्योंकि ये डॉक्टर का ही कहना है कि उसका काम सिर्फ सर्जरी करना था! अस्पताल में साफ-सफाई-सुरक्षा देखना सरकार और प्रशासन का काम है! तो क्या कोई डॉक्टर इतना गैर जिम्मेदार हो सकता है कि रिकॉर्ड बनने के चक्कर में या सरकारी काम निपटाने के चक्कर में अपने मरीज को अपने ही हाथों से मार डालेगा ? और साथ ही ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर गुप्ता ने ये भी स्वीकारा कि गलत दवाइयों के चलते महिलाओं की मौत हुई है जबकि उसने ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया था! 
 
तो अब सवाल उठता है कि डॉक्टर ने दवाइयों को जाँचने की जहमत क्यों नहीं उठाई ? जब यह सर्वविदित है कि भारत में सरकारी काम भगवान भरोसे हैं तो क्या डॉक्टरों की ज़िम्मेदारी नहीं बनती थी कि ऑपरेशन के समय महिलाओं को दी जाने वाली दवाइयों को चेक कर लिया जाये! क्या एक बार फिर रिकॉर्ड बनाने की इतनी धुन सवार थी कि दवाइयों को चेक करना जरूरी नहीं समझा!
 
या फिर प्रशासन, जो सिर्फ आंकड़े दिखाने के लिए योजनाएँ चलाते हैं! कैंप लगाए, डॉक्टर्स नियुक्त किए और हो गया काम ? अस्पताल की सुरक्षा-व्यवस्था, साफ-सफाई, दवाइयों की एक्सपायरी डेट देखना उसका काम नहीं! आपको बता दें जिस नेमिचन्द अस्पताल में ये नसबंदी कांड हुआ है वो पिछले एक साल से बंद था! और ऑपरेशन होने के बावजूद भी वहाँ साफ-सफाई नहीं थी! संभवतया गंदी,मैली अस्पताल के चलते संक्रामण फैल जाने की वजह से मौत हुई है! साथ ही इतनी तादात में सरकारी कैंप में हुई मौतों के बाद भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है! 
 
क्योंकि अभी भी कई महिलाओं की हालात गंभीर है, और वे लगातार उल्टी,दस्त की समस्या से झूज़ रही हैं और डॉक्टरों को भी बीमारी का कारण पता नहीं होने के कारण वे साधारण दवाइयाँ दे रहे हैं! डॉक्टर्स कल्चर रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं तभी मौत के कारणों का पता लग पाएगा! तो क्या यहाँ, सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं बनती है कि इतने गंभीर मामले में जल्दी रिपोर्ट मँगवाएँ और कम से कम जो महिलाएं ऑपरेशन के बाद बची हुई हैं, उनकी जान की ही हिफाजत कर ली जाये!

Friday, September 19, 2014

सरकार बदली...सोच बदली लेकिन नहीं बदला......????

जब देश में सांप्रदायिक तनाव फैल रहा है, और लव-जेहाद, गरबों में मुस्लिमों का विरोध हो रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान “भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। भारतीय मुसलमान देश के लिए जीते- मरते हैं, काफी अहम माना जा रहा है! मुस्लिम संप्रदाय में मोदी के इस बयान की खूब तारीफ हो रही है!
लेकिन सवाल उठता है, आखिर पीएम मोदी ने ये बात इस समय क्यों कहीं? इतने दिनों तक वह खामोश क्यों थे, जब भगवा नाम पर कुछ लोग सांप्रदायिकता फैला रहे थे? जब यूपी में चुनाव प्रभारी योगी आदित्यनाथ लव-जेहाद के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश कर रहे थे! यूपी में लोकसभा में मिले अच्छे-खासे बीजेपी के जनाधार की लव-जेहाद ने हवा निकाल दी! वहीं मध्य प्रदेश, गुजरात में भी गरबों में मुस्लिम की “नो एंट्री” करवायी जा रही है! साथ ही अयोध्या में भी राम मंदिर निर्माण को लेकर संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने आवाज मुखर कर दी है, और इन सब बातों का असर तुरंत ही उपचुनाव में दिखाई भी दिया! या फिर पीएम मोदी ने उपचुनाव की हार से सबक ले लिया है!
लेकिन वजह कुछ भी हो, आज भी देश में मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है और आज भी प्रधानमंत्री में विश्वास करता है! उन्हें अपने जनमत पर पूरा भरोसा है, उन्हें उम्मीद है कि उम्मीदों के दूत उम्मीदों पर खरे उतरेंगे लेकिन उसके लिए पीएम मोदी को कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे! अपनी कुर्सी बचाने के लिए और जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपेक्षा की जा रही है कि उनके नाम पर सांप्रदायिकता फैला रही पार्टियों पर लगाम लगाएँ वरना इसके बहुत बुरे परिणाम निकट भविष्य में देखने मिलेंगे क्योंकि अब जमाना बदल चुका है!
अब जाति के नाम पर वोट नहीं मिलेंगे! देश में गाँव-शहर सभी विकास चाहते हैं! मतदाता जागरूक हो गया है, सांप्रदायिकता में फँसने वालों में नहीं! कृप्या नेता, साधु-संत सांप्रदायिकता फैलाने की कोशिश न करें! मोदी के नाम पर मनमानी नहीं चलेगी! कुछ लोगों का सोचना है, मोदी की सरकार बन गयी है तो सब धर्म की राजनीति करेंगे लेकिन ज्ञानियों को समझना चाहिए कि मोदी कम बीजेपी को भारी जनादेश सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर मिला है! सबका साथ, सबका विकास के नाम पर मिला है जिसमें जातिवाद की कोई गुंजाइश नहीं है!

प्रधानमंत्री के बयान से साफ झलक रहा है कि वे सभी के प्रधानमंत्री हैं देश के कर्णधार होने के नाते पीएम मोदी को ऐसे कथित लोगों पर लगाम लगानी चाहिए जो “नमो” का सहारा लेकर भारत को गर्त में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं! भारत सर्वधर्म समभाव का देश है जहां सभी का सम्मान होना चाहिए! पूर्ण बहुमत की सरकार है, अब जाति के नाम पर वोट मिलने का युग खत्म हो चुका है, सबका साथ...सबका विकास.....जय हो 

Saturday, September 6, 2014





शिक्षा का काल चक्र

विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षक को गुरु बनना पड़ेगा ?
 
 “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाये, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताए, भारत ही ऐसा देश है जहां शिक्षक या गुरु दिवस की महत्वता भगवान से भी ऊपर बताई गयी हैं! गुरु ब्रहमा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा:, गुरु साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः अथार्थ गुरु ही ब्रहमा,विष्णु और महेश है! यह भारतीय संस्कृति ही है जिसमें शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया गया है! वहीं ऐसे छात्र भी हैं जो अपने गुरु को पूरी तरह समर्पित थे इसका हमारे इतिहास में बेहतरीन उदाहरण एकलव्य है जिसने एक बुत को अपना गुरु मानकर धनुर विध्या सीखी और दक्षिणा में गुरु को अपना अंगूठा काट कर दे दिया था, लेकिन कलयुग में शिक्षक-शिष्य के रिश्ते मानवीयता से निकलकर व्यावसायिकता के धरातल पर आ गए हैं! कलयुग में एक तरफ कुछ शिक्षक अपनी छात्रा की अस्मिता से खेल कर उसके तन-मन पर जख्म देता है और शिक्षक के नाम पर कलंक छोडता है वहीं शिष्य भी अपने गुरु की पीठ में खंजर घोंपने में एक पल का समय भी नहीं लेता!
हाल ही में आंध्र प्रदेश में एक टीचर ने 3 मासूम अंधे छात्रों को बड़ी दरिंदगी से पीटा वहीं शिक्षकों द्वारा छात्रा का रेप कर शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने की घटनाएँ आम हो चली हैं! वहीं छात्र भी शिक्षक का अपमान करने में कहाँ पीछे हैं! उज्जैन का प्रोफेसर सभरवाल हत्याकांड कौन भूल सकता है, जब कुछ छात्रों ने कॉलेज परिसर में प्रोफेसर सभरवाल की बेरहमी से हत्या कर दी!
आखिर क्या कारण है कि वर्तमान परिदृश्य में शिक्षक-छात्र के रिश्ते अपना मूल स्वरूप खोते जा रहे हैं ? क्या ये शिक्षा का व्यवसायीकरण की वजह से तो नहीं जहां कमजोर छात्रों को अतिरिक्त ज्ञान देने के लिए ट्यूशन प्रथा शुरू हुई थी जो आज पैसा कमाने का गोरखधंधा बन गयी है जिसकी वजह से भी छात्र आज शिक्षकों का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं या फिर संस्कारों का विलुप्तिकरण इसका कारण बनता जा रहा है?
आखिर वो कौन से कारण है जो भारतीय संस्कृति के सबसे पवित्र और निस्वार्थ गुरु-शिष्य के रिश्ते को कटघरे में ला खड़ा कर रहे है ?
आज के पालक अपने नौनिहालों को स्कूल-कॉलेज भेजने में भी डरते हैं! वे खौफजदा रहते हैं कि कहीं उनके बच्चे टीचर की ज्यादती, बदसलूकी या हवस का शिकार न हो जाएँ!
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की इच्छा जाहिर की! प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सपना है कि भारत फिर से विश्व गुरु तभी बन सकता है जब शिक्षकों को उचित सम्मान मिलेगा! उन्होने कहा कि मैं चाहता हूँ कि, वह दिन आए  जब प्रत्येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें! शिक्षकों की प्रतिबद्धता और ईमानदारी से देश का भविष्य आकार लेगा!
साथ ही मोदी सरकार ने शिक्षक दिवस को गुरु दिवस के रूप में मनाने की भी कोशिश की लेकिन उनकी इस पहल को तीखा विरोध झेलना पड़ा और कुछ लोगों द्वारा इसे राजनीतिक रंग दिये जाने के कारण इस निर्देश को वापस लेना पड़ा! एक तरफ हम शिक्षक और छात्रों के रिश्ते सुधारने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ शिक्षक(दिवस) को गुरु(दिवस) कहने पर विरोध प्रदर्शित कर रहे हैं!
तो क्या शिक्षक, गुरु नहीं है ?
क्या शिक्षक बच्चों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश नहीं भरता है ?
या कोई चोगा पहनने वाला ही गुरु कहलाता है, जैसे आशाराम बापू या फिर नित्यानन्द स्वामी या फिर जो बाबा धर्म को राजनीतिक चोगा पहनाने की साजिश कर भक्तों का बंटवारा करने की कोशिश करते हैं, वही गुरु हैं ?

Thursday, June 26, 2014

क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा ........!!!

http://www.newstracklive.com/HI/NewsDesc.aspx?category=Editorial&news=HNEA7073A14C25044FC8483954E3A498DADF28

क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा ........!!!




अच्छे दिन लाने का वादा कर महंगे दिन लाने वाली मोदी सरकार ने शायद चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादा अच्छे सपने दिखा दिए थे! इसीलिए पीएम मोदी की पहली कड़वी गोली को जनता पचा नहीं पा रही है! मोदीजी, चुनाव जीतने के लिए आपकी मार्केटिंग जबर्दस्त और योजनबद्ध थी! उम्मीद थी कि ऐसे ही प्लानिंग आप नीतियों को लागू करने मे करेंगे! लेकिन शायद केंद्र मे पहुँचने के बाद आप थोड़ा आश्वस्त हो गए और यूपीए की रेल भाड़ा बढ़ाने की नीति का बम आपने अचानक फोड़ डाला! कम से कम जनता को रेल सुविधाओं के नाम पर कुछ राहत तो दे देते! कुछ नहीं तो महिला कोच ही बढ़ा देते, जिन ट्रैक पर खाने-पीने की सुविधा नहीं है वहाँ कुछ इंतजाम करा देते, देश मे कुछ रूट्स ऐसे हैं कि वहाँ पीने का पानी भी नसीब नहीं होता! कुछ ट्रेनों मे पेंट्री कार ही लगवा देते! एक तो भीषण गर्मी, कमजोर मानसून उस पर महंगाई की गर्मी से जनता तिलमिला गयी है! लोकसभा चुनाव के पहले आपने जो सपने दिखाए थे उनसे जनता ने शायद रामराज्य की कल्पना कर ली हो! इसलिए आपकी रेल किराए की पहली कड़वी गोली जनता पर भारी पड़ रही है! महंगाई की गर्मी से उसे अपच हो रही है!

रेल्वे के किराए और माल भाड़े मे बृद्धि से न केवल रेल का सफर महंगा हुआ साथ ही साथ जनता का घर बनाने का सपना भी सपना ही रह गया! माल भाड़े मे बढ़ोत्तरी से सीमेंट, लोहे, स्टील के साथ साथ खाने-पीने की वस्तुओं जैसे सब्जी, फल, दूध और सब कुछ जिनकी रेल से ढुलाई होती है, सब महंगे होंगे! कोयले की ढुलाई भी रेल से होती है वैसे ही बिजली की किल्लत से यूपी और उत्तर भारत ब्लैक आउट की समस्या से जूझ रहा है! फिर कोयले के भी दाम बढ़ेंगे जिससे बिजली और महंगी होगी! कुल मिलकर आम आदमी पर चारों तरफ से महंगाई की मार पड़ रही है! सिर्फ रेल भाड़े मे इजाफे से आम आदमी चारों तरफ से महंगाई के बोझ तले दब रहा है!
पीएमजी, आप चिंता मत करो, जनता ने भारी बहुमत से आपको चुना है हम सब ताउम्र आपका साथ देंगे! उम्मीद है आप अपने कहे वादों को बहुत हद तक पूरा करेंगे! मानते हैं विरासत मे मिली जर्जर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने मे टाइम लगेगा लेकिन इसकी मार आम जनता पर क्यों? आप  रेल भाड़ा तो बढ़ा रहे हैं! लेकिन सुविधा के नाम पर क्या मिल रहा है? आपका प्रसंशक महिला वर्ग कम से कम उसे ही थोड़ी सी सुविधाएं दे देते! हमेशा से ही उसके साथ नाइंसाफ़ होता आ रहा है! हमेशा उसे अपने हक़ के लिए लड़ना पड़ रहा है! जैसे-तैसे वह घर से बाहर निकली खुद के अस्तित्व को ढूंढने के लिए, अपने घर का पेट पालने के लिए, महिलाओं की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन उसका भी किराया आपने बढ़ा दिया! कम से कम उसे रेलगाड़ी मे बैठने के लिए अतिरिक्त महिला कोच ही बढ़ा देते! जहां आप महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करते हैं वहीं उसको रोज रेलगाड़ी मे समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है! कुछ और नहीं तो कम से कम विशेष वर्ग के बारे मे सोचा होता!
उम्मीदों के साथ एक आम आदमी
मोदीजी आप हम आम जनता की उम्मीदों के दूत है! आप महंगाई तो बढ़ा रहे हैं लेकिन हमारी सैलरी तो नहीं बढ़ रही है! सीमित आय मे हम महंगाई की मार से कैसे बचेंगे! लेकिन हमारी उम्मीद आपसे टूटी नहीं है! उम्मीद है जल्दी ही आप जनहित को ध्यान मे रख अच्छे दिन लाएँगे! जनता ने यूपीए की नीतियों को नकारा था तब तो आपकी सरकार आई थी फिर यूपीए की नीतियो पर क्यों चलना? उम्मीद है आप अपने निर्देश पर फिर से अमल करेंगे! और जनहित मे अच्छे दिन लाएँगे!