Friday, September 19, 2014

सरकार बदली...सोच बदली लेकिन नहीं बदला......????

जब देश में सांप्रदायिक तनाव फैल रहा है, और लव-जेहाद, गरबों में मुस्लिमों का विरोध हो रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान “भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। भारतीय मुसलमान देश के लिए जीते- मरते हैं, काफी अहम माना जा रहा है! मुस्लिम संप्रदाय में मोदी के इस बयान की खूब तारीफ हो रही है!
लेकिन सवाल उठता है, आखिर पीएम मोदी ने ये बात इस समय क्यों कहीं? इतने दिनों तक वह खामोश क्यों थे, जब भगवा नाम पर कुछ लोग सांप्रदायिकता फैला रहे थे? जब यूपी में चुनाव प्रभारी योगी आदित्यनाथ लव-जेहाद के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश कर रहे थे! यूपी में लोकसभा में मिले अच्छे-खासे बीजेपी के जनाधार की लव-जेहाद ने हवा निकाल दी! वहीं मध्य प्रदेश, गुजरात में भी गरबों में मुस्लिम की “नो एंट्री” करवायी जा रही है! साथ ही अयोध्या में भी राम मंदिर निर्माण को लेकर संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने आवाज मुखर कर दी है, और इन सब बातों का असर तुरंत ही उपचुनाव में दिखाई भी दिया! या फिर पीएम मोदी ने उपचुनाव की हार से सबक ले लिया है!
लेकिन वजह कुछ भी हो, आज भी देश में मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है और आज भी प्रधानमंत्री में विश्वास करता है! उन्हें अपने जनमत पर पूरा भरोसा है, उन्हें उम्मीद है कि उम्मीदों के दूत उम्मीदों पर खरे उतरेंगे लेकिन उसके लिए पीएम मोदी को कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे! अपनी कुर्सी बचाने के लिए और जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपेक्षा की जा रही है कि उनके नाम पर सांप्रदायिकता फैला रही पार्टियों पर लगाम लगाएँ वरना इसके बहुत बुरे परिणाम निकट भविष्य में देखने मिलेंगे क्योंकि अब जमाना बदल चुका है!
अब जाति के नाम पर वोट नहीं मिलेंगे! देश में गाँव-शहर सभी विकास चाहते हैं! मतदाता जागरूक हो गया है, सांप्रदायिकता में फँसने वालों में नहीं! कृप्या नेता, साधु-संत सांप्रदायिकता फैलाने की कोशिश न करें! मोदी के नाम पर मनमानी नहीं चलेगी! कुछ लोगों का सोचना है, मोदी की सरकार बन गयी है तो सब धर्म की राजनीति करेंगे लेकिन ज्ञानियों को समझना चाहिए कि मोदी कम बीजेपी को भारी जनादेश सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर मिला है! सबका साथ, सबका विकास के नाम पर मिला है जिसमें जातिवाद की कोई गुंजाइश नहीं है!

प्रधानमंत्री के बयान से साफ झलक रहा है कि वे सभी के प्रधानमंत्री हैं देश के कर्णधार होने के नाते पीएम मोदी को ऐसे कथित लोगों पर लगाम लगानी चाहिए जो “नमो” का सहारा लेकर भारत को गर्त में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं! भारत सर्वधर्म समभाव का देश है जहां सभी का सम्मान होना चाहिए! पूर्ण बहुमत की सरकार है, अब जाति के नाम पर वोट मिलने का युग खत्म हो चुका है, सबका साथ...सबका विकास.....जय हो 

Saturday, September 6, 2014





शिक्षा का काल चक्र

विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षक को गुरु बनना पड़ेगा ?
 
 “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाये, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताए, भारत ही ऐसा देश है जहां शिक्षक या गुरु दिवस की महत्वता भगवान से भी ऊपर बताई गयी हैं! गुरु ब्रहमा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा:, गुरु साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः अथार्थ गुरु ही ब्रहमा,विष्णु और महेश है! यह भारतीय संस्कृति ही है जिसमें शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया गया है! वहीं ऐसे छात्र भी हैं जो अपने गुरु को पूरी तरह समर्पित थे इसका हमारे इतिहास में बेहतरीन उदाहरण एकलव्य है जिसने एक बुत को अपना गुरु मानकर धनुर विध्या सीखी और दक्षिणा में गुरु को अपना अंगूठा काट कर दे दिया था, लेकिन कलयुग में शिक्षक-शिष्य के रिश्ते मानवीयता से निकलकर व्यावसायिकता के धरातल पर आ गए हैं! कलयुग में एक तरफ कुछ शिक्षक अपनी छात्रा की अस्मिता से खेल कर उसके तन-मन पर जख्म देता है और शिक्षक के नाम पर कलंक छोडता है वहीं शिष्य भी अपने गुरु की पीठ में खंजर घोंपने में एक पल का समय भी नहीं लेता!
हाल ही में आंध्र प्रदेश में एक टीचर ने 3 मासूम अंधे छात्रों को बड़ी दरिंदगी से पीटा वहीं शिक्षकों द्वारा छात्रा का रेप कर शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने की घटनाएँ आम हो चली हैं! वहीं छात्र भी शिक्षक का अपमान करने में कहाँ पीछे हैं! उज्जैन का प्रोफेसर सभरवाल हत्याकांड कौन भूल सकता है, जब कुछ छात्रों ने कॉलेज परिसर में प्रोफेसर सभरवाल की बेरहमी से हत्या कर दी!
आखिर क्या कारण है कि वर्तमान परिदृश्य में शिक्षक-छात्र के रिश्ते अपना मूल स्वरूप खोते जा रहे हैं ? क्या ये शिक्षा का व्यवसायीकरण की वजह से तो नहीं जहां कमजोर छात्रों को अतिरिक्त ज्ञान देने के लिए ट्यूशन प्रथा शुरू हुई थी जो आज पैसा कमाने का गोरखधंधा बन गयी है जिसकी वजह से भी छात्र आज शिक्षकों का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं या फिर संस्कारों का विलुप्तिकरण इसका कारण बनता जा रहा है?
आखिर वो कौन से कारण है जो भारतीय संस्कृति के सबसे पवित्र और निस्वार्थ गुरु-शिष्य के रिश्ते को कटघरे में ला खड़ा कर रहे है ?
आज के पालक अपने नौनिहालों को स्कूल-कॉलेज भेजने में भी डरते हैं! वे खौफजदा रहते हैं कि कहीं उनके बच्चे टीचर की ज्यादती, बदसलूकी या हवस का शिकार न हो जाएँ!
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की इच्छा जाहिर की! प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सपना है कि भारत फिर से विश्व गुरु तभी बन सकता है जब शिक्षकों को उचित सम्मान मिलेगा! उन्होने कहा कि मैं चाहता हूँ कि, वह दिन आए  जब प्रत्येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें! शिक्षकों की प्रतिबद्धता और ईमानदारी से देश का भविष्य आकार लेगा!
साथ ही मोदी सरकार ने शिक्षक दिवस को गुरु दिवस के रूप में मनाने की भी कोशिश की लेकिन उनकी इस पहल को तीखा विरोध झेलना पड़ा और कुछ लोगों द्वारा इसे राजनीतिक रंग दिये जाने के कारण इस निर्देश को वापस लेना पड़ा! एक तरफ हम शिक्षक और छात्रों के रिश्ते सुधारने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ शिक्षक(दिवस) को गुरु(दिवस) कहने पर विरोध प्रदर्शित कर रहे हैं!
तो क्या शिक्षक, गुरु नहीं है ?
क्या शिक्षक बच्चों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश नहीं भरता है ?
या कोई चोगा पहनने वाला ही गुरु कहलाता है, जैसे आशाराम बापू या फिर नित्यानन्द स्वामी या फिर जो बाबा धर्म को राजनीतिक चोगा पहनाने की साजिश कर भक्तों का बंटवारा करने की कोशिश करते हैं, वही गुरु हैं ?