Monday, November 17, 2014

 
 कांग्रेस के नेहरू कार्यक्रम में मोदी नहीं .....
ये बात सही है कि कांग्रेस की न तो रणनीति अच्छी है और न ही मार्केटिंग! लोक सभा चुनाव में मिली शर्मनाक हार से भी कांग्रेस कुछ नहीं सीख सकी है! 60 साल तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस शायद मोदी के कहर से कमजोर पड़ रही है! उसके सोचने समझने की शक्ति भी क्षीण होती जा रही है वरना इतना अच्छा मौका उसने हाथ से जाने दिया जब वह अपना बड़प्पन दिखाकर अपना कद थोड़ा बड़ा सकती थी और भाईचारे की मिसाल दे सकती थी! नेहरू जयंती के कार्यक्रम में यदि कॉंग्रेस 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दे देती तो छोटी नहीं हो जाती बल्कि उसकी इज्जत बढ़ती ही !
एक तरफ कांग्रेस ने नेहरू जयंती पर दुनिया के 54 देशों के प्रमुखों को न्योता दिया लेकिन भारत के मुखिया नरेंद्र मोदी को नहीं, जो कांग्रेस की छोटी सोच को दर्शाता है! या फिर कांग्रेस में शिष्टाचार की कमी कह सकते हैं! कम से कम शिष्टाचार के नाते मोदी को न्योता भेजा जा सकता था वो भी तब जबकि यह स्पष्ट था कि मोदी कार्यक्रम में नहीं आने वाले थे क्योंकि वे आसियान यात्रा पर हैं!
कांग्रेस, मोदी सरकार से इस बात पर नाराज है कि 31 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को काफी तवज्जो दी वहीं इन्दिरा गांधी की अनदेखी कर दी! जबकि ज्ञात को जब कांग्रेस सत्ता में थी तो 31 अक्टूबर को इन्दिरा की पुण्य तिथि के रूप में ही याद किया गया है! मोदी के केंद्र में आते ही ये पहला मौका है कि दुनिया ने सरदार पटेल का महत्व भी जाना!
तो इस बार कांग्रेस के लिए तो मौका अच्छा था वह बीजेपी को भी थोड़ा नीचे दिखा सकती थी लेकिन हार से बौखलाई और उसके बाद पीएम मोदी द्वारा महात्मा गांधी और सरदार पटेल की जयंती पर देश व्यापी कार्यक्रम कर वाह वाह लूट ली और कांग्रेस को महसूस हुआ कि उनके पटेल- गांधी भी मोदी उनसे छीन रहे हैं! या फिर मोदी के बढ़ते कद से कांग्रेस तिलमिला गयी है! खैर जो भी है, लेकिन यह सच है कि कांग्रेस का ये रवैया उसे गर्त में धकेल रहा है!
वहीं पीएम मोदी ऐसे अवसरों को भुनाना बखूबी जानते हैं! मोदी अपनी रणनीति से अपने विरोधियों को भी अपना मुरीद बना लेते हैं! कांग्रेस राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपनी धरोहर समझती है, उन्हीं की जयंती पर मोदी ने “स्वच्छ भारत” अभियान देश भर में चलाया और बड़ी शख़्सियतों को तो इस आंदोलन से जोड़ा ही वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को भी जोड़ लिया! और सबकी तारीफ के पात्र बन गए!
वहीं मोदी लगातार “सबका साथ, सबका विकास” की राजनीति कर रहे हैं और समय समय पर कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर चलते हैं! वहीं पीएम मोदी शिष्टाचार और बड़े दिल का भी प्रदर्शन करते हैं! इसकी बानगी सबसे पहले देखने मिली लोकसभा के पहले सत्र में सांसदों के शपथग्रहण में पीएम मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के बाद सोनिया गांधी का शपथग्रहण हुआ! 16वीं लोकसभा के पहले दिन मोदी ने विपक्षी बेंच के पास जाकर सोनिया गांधी का अभिवादन भी किया! वहीं प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके घर भी गए और हाल ही में मनमोहन सिंह को जापान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर उन्हें बधाई भी दी साथ ही मनमोहन सिंह के जन्म दिन पर भी उन्हें बधाई दी! यह मोदी के बड़े दिल और खुली सोच को दर्शाता है, जो उन्हें हर दिल अजीज बना रहा है और वह देश के साथ विदेशों में भी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से चढ़ रहे हैं!

हाल ही में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए नसबंदी कांड में अब तक 14 महिलाओं की मौत हो चुकी है और 33 अभी भी गंभीर हालत में हैं! परिवार नियोजन के लिए गई महिलाएं तो मौत के मुंह में जा चुकी हैं लेकिन पीछे छोड़ गयी हैं कई अनगिनत सवाल...... जिनका जवाब प्रशासन और चिकित्सक एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं! पहला सवाल तो सरकारी योजनाओं पर लग रहा है जिस जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार देश भर में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रही है वही बेअसर साबित होकर लोगों को लील गया! जिस डॉक्टर आर के गुप्ता को रमन सरकार ने 50 हजार से अधिक नसबंदी ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड बनाने पर पुरुष्कृत किया, उसी डॉक्टर ने सरकार की योजना पर कलंक लगा दिया और एक नसबंदी कैंप में सबसे अधिक महिलाओं की मौत का एक और रिकॉर्ड अपने और शायद छत्तीसगढ़ सरकार के नाम कर दिया! आपको बता दें आरोपी डॉक्टर गुप्ता ने 5 घंटे में 83 ऑपरेशन कर दिये!
 
सबसे बड़ा प्रश्न तो यही खड़ा हो रहा है कि बेचारा गरीब आदमी सरकार की योजनाओं पर विश्वास करेगा ? सरकार पर भरोसा करके फिर से मौत की दहलीज पर जाएगा? यदि नहीं जाएगा तो देश की जनसंख्या नियंत्रण का क्या होगा? और यदि जाएगा तो उसे कितनी हिम्मत बटोरनी पड़ेगी ?
शायद प्रदेश और देश के इतिहास में ये पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी सारी महिलाओं की मौत नसबंदी ऑपरेशन की वजह से हुई है! लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी लेगा कौन? 
 
  नसबंदी कांड....एक और रिकॉर्ड ???
वह डॉक्टर, जिसे भगवान का रूप समझकर उन महिलाओं ने खुद को उसके हवाले कर दिया था! डॉक्टर पर इतना विश्वास करके गाँव की गरीब, अनपढ़ महिलाएं अस्पताल की उस दहलीज पर गईं थी जिसे वह नया जीवनदाता समझती थीं! लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि भगवान समान डॉक्टर सिर्फ प्रोफेशनल तरीके से काम करेगा! यदि उसका काम सर्जरी है तो सिर्फ सर्जरी ही करेगा! और अपनी ज़िम्मेदारी भूल जाएगा! क्योंकि ये डॉक्टर का ही कहना है कि उसका काम सिर्फ सर्जरी करना था! अस्पताल में साफ-सफाई-सुरक्षा देखना सरकार और प्रशासन का काम है! तो क्या कोई डॉक्टर इतना गैर जिम्मेदार हो सकता है कि रिकॉर्ड बनने के चक्कर में या सरकारी काम निपटाने के चक्कर में अपने मरीज को अपने ही हाथों से मार डालेगा ? और साथ ही ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर गुप्ता ने ये भी स्वीकारा कि गलत दवाइयों के चलते महिलाओं की मौत हुई है जबकि उसने ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया था! 
 
तो अब सवाल उठता है कि डॉक्टर ने दवाइयों को जाँचने की जहमत क्यों नहीं उठाई ? जब यह सर्वविदित है कि भारत में सरकारी काम भगवान भरोसे हैं तो क्या डॉक्टरों की ज़िम्मेदारी नहीं बनती थी कि ऑपरेशन के समय महिलाओं को दी जाने वाली दवाइयों को चेक कर लिया जाये! क्या एक बार फिर रिकॉर्ड बनाने की इतनी धुन सवार थी कि दवाइयों को चेक करना जरूरी नहीं समझा!
 
या फिर प्रशासन, जो सिर्फ आंकड़े दिखाने के लिए योजनाएँ चलाते हैं! कैंप लगाए, डॉक्टर्स नियुक्त किए और हो गया काम ? अस्पताल की सुरक्षा-व्यवस्था, साफ-सफाई, दवाइयों की एक्सपायरी डेट देखना उसका काम नहीं! आपको बता दें जिस नेमिचन्द अस्पताल में ये नसबंदी कांड हुआ है वो पिछले एक साल से बंद था! और ऑपरेशन होने के बावजूद भी वहाँ साफ-सफाई नहीं थी! संभवतया गंदी,मैली अस्पताल के चलते संक्रामण फैल जाने की वजह से मौत हुई है! साथ ही इतनी तादात में सरकारी कैंप में हुई मौतों के बाद भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है! 
 
क्योंकि अभी भी कई महिलाओं की हालात गंभीर है, और वे लगातार उल्टी,दस्त की समस्या से झूज़ रही हैं और डॉक्टरों को भी बीमारी का कारण पता नहीं होने के कारण वे साधारण दवाइयाँ दे रहे हैं! डॉक्टर्स कल्चर रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं तभी मौत के कारणों का पता लग पाएगा! तो क्या यहाँ, सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं बनती है कि इतने गंभीर मामले में जल्दी रिपोर्ट मँगवाएँ और कम से कम जो महिलाएं ऑपरेशन के बाद बची हुई हैं, उनकी जान की ही हिफाजत कर ली जाये!