31 January 2016
जब रिश्ते असफल होते हैं तो हम डर जाते हैं, निराश हो जाते हैँ., दुःख होता है... दुःख मना लेना चाहिए लेकिन दुःख को ज़िन्दगी नहीं मानना चाहिए! बल्कि खुश होना चाहिए कि जितने समय रहे साथ रहे, खुश रहे , ज़िन्दगी का आनंद लिया, खूब जिया! हर अंत एक नई शुरुआत देता है! जीवन को नए सिरे से शुरू करने का अवसर , इसका भी जश्न मनाओ, उत्सव मनाओ! जो करने का मन होता है वो करो! लेकिन ब्रेकअप की स्थिति में सबसे बड़ी बात कुछ करने का मन ही नहीं होता! यही हम गलती कर बैठते है! अपने को इस स्थिति से निकाल कर बाहर निकलो, नए लोगों से मिलो, अपनी पसंद के लोग शायद जल्दी न मिले , धैर्य रखो, लेकिन मिलेंगे जरूर , खुद पर विश्वास रखना... मंजिल मिलेगी जरूर... ज़िद यदि कुछ पाने की है तो कोई नहीं रोक सकता न ही आपकी किस्मत और न ही नियति.. आपके दृण इरादों से प्रकृति भी झुकेगी बस आपकी ज़िद सकारात्मक रहे! टूटे रिश्ते तो नहीं कहना चाहिए सुखद विच्छेद का सम्मान करते हुए नए को अपनाने के लिए तैयार रहे!
टूटे रिश्ते से लेकर नए रिश्ते बनने तक का सफर कठिन जरूर होता है, इस समय का सदुपयोग करें! एकांत का आनंद लें! ध्यान करें! कुछ नई अनुभूति होगी! पक्का... बस सब्र रखना होगा!
एक बात और अपने सुख के लिए दूसरे पर निर्भरता दुःख ही लाती है ! रिश्ता दो लोगों से मिलकर बनता है, यदि कोई एक भी रिश्ते में खुश नहीं है तो उसे अपने साथी को प्रेमपूर्वक मुक्त कर देना चाहिए क्योंकि रिश्तों में बंधन नहीं स्वतंत्रता, उन्मुक्तता होती है साथ ही अलग हो रहे साथी में भी समानुभूति हो, जिस साथी को वह अब छोड़ रहा है, उसे बीच में न छोड़ कर एक मुकाम तक ले जाए जहाँ वो खुद को संभाल सके, मानसिक रूप से सम्बन्ध विच्छेद के लिए तैयार कर सके... सम्मानपूर्वक ब्रेकअप का जश्न मनाकर , एक दूसरे के भविष्य के लिए शुभकामनाएं देकर नए सफर पर निकलना चाहिए !
अंत में , हर रिश्ते को भरपूर जी लो, जी भर कर जियो कि बिछड़ने का दुःख न रहे!
